इड़ा-पिंगला द्वैत मिटाकर,
सुषुम्ना में अद्वैत जो पाता,
उसे न कोई कोर्स लुभाता,
न वो किसी का कल्ट बनाता ॥
अगर खोल दें भेद नाड़ियों का,
तो बिकना बंद हो जाए मेंबरशिप,
इसीलिए तो मंचों पर वे,
शब्दों का मायाजाल सजाते ॥
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