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खिलाई थी कभी तूने।

                
                                                         
                            इलायची तोड़के मुँह से जो खिलाई थी कभी तूने।।
                                                                 
                            
अभी तक महकती साँसे जो सजाई थी कभी तूने।।

मेरी धड़कन में रहती हो दिल ये महसूस करता है,,
अभी तक माला जपता हूँ जो बनाई थी कभी तूने।।

तेरी सांसों की गर्मी को भुला ना पाया ये दिल भी,,
अभी तक भी सुलगती है जो लगाई थी कभी तूने।।

क़सम अपनी मोहब्बत की क़सम ना भूल पाए हैं,,
अभी तक याद रहती है जो खिलाई थी कभी तूने।।

सुना था वक़्त के हाथों धुँधली हो जाती हैं तस्वीरें,,
अभी भी दिल में ताज़ा है जो दिखाई थी कभी तूने।।

पुरानी यादों के मेलों से मुझे तेरी आवाज़ आती हैं,,
अभी तक कानों में रहती जो सुनाई थी कभी तूने।।

अभी घर की दर ओ दीवार पर लटकी हुई है देव,,
कभी गाँव के मेले से शय जो दिलाई थी कभी तूने।।
-सुनील देव
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4 घंटे पहले

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