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चख ना पाया देर तक।

                
                                                         
                            वादा करके इश्क़ का कोई रख ना पाया देर तक।।
                                                                 
                            
ज़हर तो फिर ज़हर है कोई चख ना पाया देर तक।
मरके भी क्या ज़िंदगी के ख़्वाब पूरे होते है यहाँ,,
थक गया जो राह में वो चल ना पाया देर तक।।
क्या घड़ी घड़ी आईने को ही देखते रहते हो तुम,,
चेहरा कितना भी हंसी हो बच ना पाया देर तक।।
तू मुझे यूँ देखकर ना इक अंजान से नज़रे मिला,,
फांसिला तो फांसिला है रह ना पाया देर तक।।
साथ रहने के लिए बस तू मेरे सामने रहना सदा,,
आँख से दरिया चला जो बह ना पाया देर तक।।
जां तो जां है इसका भी तो अपना इक मुक़ाम है,,
धड़कनों का शोर दिल में रह ना पाया देर तक।।
तू समझता है के तेरी कोई चाल समझा ही नहीं,,
मैं ये कहता हूं के देव कोई रच ना पाया देर तक।।
-सुनील देव
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39 मिनट पहले

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