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आशियाना बन गया हूँ

                
                                                         
                            मै मुज़्तरिब रूह का, आशियाना बन गया हूँ
                                                                 
                            
तेरी हिज्र में यार मै,दीवाना बन गया हूँ

कैसे बताए इश्क़ का, ये कैसा सिला हुआ
तेरे तबस्सुम को देख कर मेरा दिल मचल गया

राहें वफ़ा तो उल्फ़त की हम याद करके सोये
तेरी झील जैसी नजरों की गहराई में हम खोये

मै मुज़्तरिब रूह का, आशियाना बन गया हूँ
तेरी हिज्र में यार मै,दीवाना बन गया हूँ

मैं ख़ुद से दूर हो गया, तुझे अपना बनाने में,
मेरी जिंदगी गुज़र गई, तेरा साथ पाने में।

मैं मुज़्तरिब रूह का, आशियाना बन गया हूँ,
तेरे हिज्र में यार मैं, दीवाना बन गया हूँ।

तेरी यादों का चराग़ अब, मेरी शब में जले,
तेरे लौट आने का वहम,मेरे सपनों में पले

तेरी ख़ामोश निगाहों में, कोई पैग़ाम ढूँढ़ता हूँ,
तेरे बिखरे हुए ख़्वाबों में, अपना नाम ढूँढ़ता हूँ।

मेरी रूह की सदाओं में, तेरा ही ज़िक्र बाक़ी है,
तू नहीं है पास मेरे, तेरी कमी ही काफ़ी है।

मैं मुज़्तरिब रूह का, आशियाना बन गया हूँ,
तेरे हिज्र में यार मैं, दीवाना बन गया हूँ।
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43 मिनट पहले

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