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सफरनामा

                
                                                         
                            सफ़र है
                                                                 
                            
मुश्किलें तो आएंगीं
न आएं तो सफ़र कैसा
सफ़र करोगे?
किसका?
जिंदगी का
हां सफ़र ही तो है जिंदगी
फिर जिंदगी क्या है
क्या सफ़र है जिंदगी
हां वही तो है
सफ़र जो पल बीत रहा है वो है
तो फिर जिंदगी क्या है
सफ़रनामा
हां एक तरह से वही है
पर क्या हर सफ़र मंजिल के करीब लाएगा
शायद नहीं
पर जो सफ़र का आनंद है वो मंज़िल मिलने पर नहीं मिलेगा
ये सफ़र भी बड़े कमाल की चीज है
हमें कोई पल सफ़र में बहुत अच्छा लगता है
फिर हम सोचते हैं कि वो पल बस ठहर जाये
पर क्या ये हो सकता है
शायद टाइम मशीन होती तों मैं यही करता
सफ़र में पीछे जाता और अपना सफरनामा लिखता
तो लिखिए अपना सफरनामा
कोई पल खुशबसूरत लगे तो उसको जी लो
क्योंकि फिर न वो पल लौटकर आएगा
न सफ़र और न जिंदगी
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एक घंटा पहले

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