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औपचारिकता

                
                                                         
                            आजकल हर रिश्ता निभाना महज़ एक औपचारिकता है,
                                                                 
                            
इसलिए रिश्ता वैसा सुंदर होता नहीं, जैसा तस्वीरों में दिखता है।
रंग-बिरंगे झूठ सजा रखे हैं लोगों ने अपनी जुबां पर,
बस एक शायर ही है, जो काली स्याही से सच लिखता है।
सच की तो फ़ितरत है नीलाम होना,
वह तो बस झूठ ही है, जो कौड़ी से करोड़ में बिकता है!
भले मेरा भगवान पत्थर बना बैठा है आँखें मूंदकर,
पर मुझे पता है, उसको बंद आँखों से भी सब दिखता है।
-साहिल
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11 घंटे पहले

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