गुरू आपकी महिमा अपरम्पार
आपके बिना राष्ट्र निराधार
आपने ही कुशल मनुष्य बनाया
अनुशासन में जीना सिखाया
निस्वार्थ भाव से ज्ञान दिया
कभी नहीं कुछ भी मांगा
आपके आगे शीष झुकाते सब
आपको नमन सत सत नमन।
°सागर°
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