"ले चलो उस ठौर माधव"
ले चलो उस ठौर माधव,
थमें दर्द का दौर माधव।
सिसकियाँ सुला रही हैं,
दर्द में ही जगा रही हैं।
अब तो दो विश्राम माधव,
ले चलो उस ठौर माधव।
थमें दर्द का दौर माधव,
ले चलो उस ठौर माधव।
आँख में आँसू ठहरे हैं,
साँस के स्वर भी गहरे हैं।
थक गई यह देह माधव,
कब मिलेगा नेह माधव?
अब न कोई आस माधव,
बस तुम्हीं विश्वास माधव।
थाम लो यह हाथ माधव,
ले चलो निज साथ माधव।
ले चलो उस ठौर माधव,
थमें दर्द का दौर माधव।
अब तो दो विश्राम माधव,
ले चलो उस ठौर माधव।
साधना मिश्रा विंध्य
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