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इन्तजार

                
                                                         
                            इंतजार के दिए उसने भी तो जलाए होंगे
                                                                 
                            
सैकड़ो सवाल मन में उसके भी तो आए होंगे
याद कर कर के ख्वाबो के महल भी तो सजाए होगे
बड़ी फिक्र उनको मेरी दिन रात होगी
जो कट न सके आज वो रात होगी

कोई उम्मीद कोई आह कोई वजह रही होगी
इन हिचकियों की पुकार ना बेवजह रही होगी
आईना जो देखा होगा तो आखे रोई होगी
जाने कितने दिनों से न ये आंखें सोई होगी
खुली खुली पलकों पे
उठा के रखी उन्होंने बरसात होगी
बड़ी फिक्र उनको मेरी दिन रात होगी
जो कट न सके आज वो रात होगी

आंखें गई होगी जब सूख
तब तस्वीरों में मुझको तलाशा होगा
अपने लिबास के आंचल से पोछकर
और मुझको तराशा होगा
जाने किस तरह से उन्होंने
अपने आप को समझाया होगा
खुद से किए होंगे सवाल कई
खुद से ही जवाब पाया होगा
जहन में उठे हजारो सवालातो की
आज बारात होगी
बड़ी फिक्र उनको मेरी दिन रात होगी
जो कट न सके आज वह रात होगी
-सचिन निगम
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एक घंटा पहले

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