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मां की ममता

                
                                                         
                            रोता है मां का प्यार ये आंचल और श्रृंगार।
                                                                 
                            
तुम ही तो थे कभी मेरे गले का हार
जब से तुमने ये आंचल छोड़ा,
न जाने क्या क्या होते है आंखों की मत बात करो दिल भी सपनों में रोते हैं।
उपवन की बागियों ने जब से,। ये लाल लालिमा खोई है जब से तुमने ये आंचल छोड़ा ,।
मैं फूट फूट कर रोई हूं। हे: ईश्वर मेरी ममता को
तुम देना हर पल वो उजियार
बन जाए उसकी किस्मत प्रभु
कर देना ऐसा उपकार। हे लाल हमारी ममता भी नदिया की जैसी धारा है इक फूल खिला है आंचल में तू ही तो आंख का तारा है। 
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2 वर्ष पहले

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