मेरा वतन
बारिश के रिमझिम सा
मेरा वतन
मट्टी के खुशबुसा
मेरा वतन
हिमालय के हवासा
मेरा वतन
अरबी समुद्र सा
मैने सारे सपने
इस मिट्टी में सजाए
मैने हर बुंद
हथेली में जमाए
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