अभूतपूर्व और तेजस्वी था उनका अस्तित्व;
कुछ ऐसा था प्रणब दा का अदभुत व्यक्तित्व!
शिक्षक, पत्रकार, राजनेता व कवि;
राजनीति में उनकी साफ और स्वच्छ छवि!
संभाले आपने - विदेश, वित्त, वाणिज्य और रक्षा मंत्रालय;
भारत रत्न से सुसज्जित, आप थे एक जीवंत विद्यालय!
नमन है उस लोकप्रिय नेता को, जो थे विद्वान व प्रतिभाशाली;
आपको हम सब देशवासियों की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि!
~रूना लखनवी
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