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प्रणब दा

                
                                                         
                            अभूतपूर्व और तेजस्वी था उनका अस्तित्व;
                                                                 
                            
कुछ ऐसा था प्रणब दा का अदभुत व्यक्तित्व!

शिक्षक, पत्रकार, राजनेता व कवि;
राजनीति में उनकी साफ और स्वच्छ छवि!

संभाले आपने - विदेश, वित्त, वाणिज्य और रक्षा मंत्रालय;
भारत रत्न से सुसज्जित, आप थे एक जीवंत विद्यालय!

नमन है उस लोकप्रिय नेता को, जो थे विद्वान व प्रतिभाशाली;
आपको हम सब देशवासियों की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि!

~रूना लखनवी

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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5 वर्ष पहले

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