नारी आप नारायणी हैं,
जीवन की जीत हैं।
काल के कपाल पर,
लिखा सुख मंत्र हैं।
सुरभित बनमाल हैं,
जीवन की ताल हैं।
मधु से सिंचित-सी,
कविता सप्रसंग हैं।
जीवन की छाया हैं,
प्रेरणा की आधार हैं
हर पल जो साथ रहे,
स्नेह की परछाईं हैं।
माता का मान हैं,
पिता का सम्मान हैं।
पति की साथी हैं,
रिश्तों की शान हैं।
हर युग में पूजित हैं,
स्वयं से प्रेरित हैं
जीवन का अंकुर हैं,
मात्र रूप उर्जित हैं।
परिवार की मर्यादा हैं,
प्रेमपूर्ण वादा हैं।
त्याग के सान्निध्य में,
खुशी का इरादा हैं।
रंगभरी होली हैं,
फगुन की टोली हैं।
प्रेमरस पागी-सी,
कोयल की बोली हैं।
मन का अनुबंध हैं,
वात्शल्य का निबन्ध हैं
जीवन को परिभाषित करता
आत्मिक सम्बन्ध हैं।
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