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वो मुझे त्योहारों सा लगता है

                
                                                         
                            वो मुझे त्योहारों सा लगता है
                                                                 
                            

उसके ख़ुश होने से
जल उठते हैं एक साथ
हज़ारों दीये —
जिनकी लौ से
मन का हर कोना
रोशन-रोशन सा लगता है।
वो मुझे त्योहारों सा लगता है।

उसकी बातों को सुनकर
लगता है जैसे
दूर कहीं मद्धम-मद्धम
बज उठी हों जाने कितनी
स्वरलहरियाँ एक साथ —
वो मन के आँगन में
किसी साज-सा बजता है।
वो मुझे त्योहारों सा लगता है।

उसका साथ होना
अजीब-सा सुकून देता है —
जब भी वो मेरी चेहरे
पर नज़र करता है,
उतर आती है रौनक कुछ ऐसी
जैसे दीवाली पर
पूरा शहर रोशनी से
सजता संवारता है।
वो मुझे त्योहारों सा लगता है।

कभी-कभी सोचती हूँ,
क्या ईश्वर ने भी
अपने किसी उत्सव की रात
उसे रचा होगा…
क्योंकि उसके मन का हर भाव
मुझे प्रार्थनाओं-सा
पवित्र लगता है।

वो मुझे सचमुच
त्योहारों सा लगता है।
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10 महीने पहले

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