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बाँध कफ़न सीमा पे खड़े देखो तो यही दिलवाले हैं।

                
                                                         
                            बाँध कफ़न सीमा पे खड़े देखो तो यही दिलवाले हैं।
                                                                 
                            
महबूब वतन है जिनका वो मस्त मगन मतवाले हैं।
आन बान और शान के खातिर,
देश के अभिमान के खातिर।
जान को अपनी दांव लगाएं ,
खड़े हैं हिंदुस्तान के खातिर।
आबाद रहे ये देश हमारा खड़े हुए रखवाले हैं।
महबूब वतन है जिनका वो मस्त मगन मतवाले हैं ।
सियाचीन की महाशीत
या तपता रेगिस्तान हो,
एक स्वप्न है आँखों में
बस हँसता हिंदुस्तान हो,
जो तूफानों में अडिग रहे वो वीर हिम्मतवाले हैं।
महबूब वतन है जिनका वो मस्त मगन मतवाले हैं।
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7 घंटे पहले

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