“कहने को तो सब मेरे आसपास है
फिर भी ये दिल मेरा कितना उदास है
चहरे पर नक़ाब लिए हर शक्स है यहां
न जाने यहाँ किसका दिल किसके पास है
क़िस्मत के बिछड़े हैं यहाँ हम दोनों
वहाँ तुम उदास हो यहाँ हम उदास है
देखेगा एक दिन ये जहाँ सारा हमको
तुम हमारे पास हो कि हम तुम्हारे पास हैं
महफ़िल-ए-आम कर रहा हूँ जो आजकल
ख़ाक में मिले हुए वो हमारे अहसास है।”
—रोहित तिवारी
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