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ख़ता नज़रों की है मेरी

                
                                                         
                            “मेरी मौत में शामिल,
                                                                 
                            
वो दिलनशीं हमारा है ,
सजा-ए-माफ़ दे-दो उनको
गुनाह-ए-दिल हमारा है,
मिज़ाज-ए-क़ातिल हैं जो
है क़सूर क्या उनका?
ख़ता नज़रों की है मेरी
मुझे मेरे दिल ने मारा है।”
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14 घंटे पहले

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