हे युवा ! अब आगे आओ, हमें देश को बचाना है,
इस सोई हुई व्यवस्था को, अब सच का आईना दिखाना है।
जब-जब यहाँ अन्याय हुआ, तब-तब यहाँ युवा बोला है,
बहरे-गूँगे शासकों का, तब-तब सिंहासन डोला है।
अब बंद करो ये खामोशी, अब हक के लिए चिल्लाना है,
जो दबा रहे आवाज़ों को, उनको औकात बताना है।
ये देश हमारा अपना है, कोई जागीर पुरानी नहीं,
अब जुल्म सहेंगे चुप रहकर, हम ऐसी कौम दीवानी नहीं।
जो कुर्सी पर बैठे अंधे, उनको झकझोर जगाना है,
इस सोई हुई व्यवस्था को, अब सच का आईना दिखाना है।
तुम मशाल बनके उठो ज़रा, अंधियारा दूर भगाना है,
हर एक भ्रष्ट और पाखंडी का, अब मुखौटा हमें हटाना है।
तुम रगों में बहता खून नहीं, क्रांति का एक उबलाओ हो,
इस देश के उजड़े गुलशन में, तुम ही तो नई बहार हो।
चलो हाथ मिलाकर साथ बढ़ो, एक नया दौर अब लाना है,
इस सोई हुई व्यवस्था को, अब सच का आईना दिखाना है।
— रोहित शर्मा भारद्वाज 'नादिर'
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