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ठहर जाना भी सीखो तुम...

                
                                                         
                            उजाला बन के आँखों में ठहर जाना भी सीखो तुम
                                                                 
                            
अगर आए हो दिल में, तो उतर जाना भी सीखो तुम

चिरागों को हवाओं से तो लड़ना ही पड़ेगा अब
मगर महफ़िल में चुपके से बिखर जाना भी सीखो तुम

मुहब्बत में बदन की बंदिशें तो टूट जाती हैं
रुहानी छांव बनकर रुह में रम जाना भी सीखो तुम

वफ़ा की राह में कुछ मोड़ ऐसे भी तो आते हैं
किसी के वास्ते हद से गुज़र जाना भी सीखो तुम

हमेशा जीतना ही तो हुनर होता नहीं 'नादिर'
कभी अपनों की ख़ातिर हार जाना भी तो सीखो तुम
— रोहित शर्मा भारद्वाज 'नादिर'
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2 महीने पहले

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