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साक्षी भाव पर नादिर का दोहा

                
                                                         
                            लहरें उठतीं सिंधु में, पर सागर निष्कंप।
                                                                 
                            
तू केवल द्रष्टा यहाँ, छोड़ हृदय का कंप।।

— रोहित शर्मा भारद्वाज 'नादिर' 
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2 घंटे पहले

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