सँभलना और सँभालना तो कमज़ोर दिलों का काम है,
हम वो तूफ़ान हैं जिनका साहिल पर भी कोहराम है।
जो समझते हैं हमें अपने बस से बाहर की बात,
ज़रा इतिहास पढ़ लें, हमारा हर पन्ना एक नया मुक़ाम है।
- रोहित शर्मा भारद्वाज 'नादिर'
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