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चाँद सी सूरत में

                
                                                         
                            चाँद सी सूरत में,चांदनी की है बिंदिया।
                                                                 
                            
तेरे यादो में ही,गुजर जाती है ये रात की निदिया।
तू बेवफा नही हम जानते है, पर लोग नही मानते है।
लोगो का क्या?है, कुछ भी मन मे वहम पालते है।
ओ लोग ही थे,जो सीता का भी अग्नि परीक्षा लिया।
लोगो के कहने पर ही,सीता ने ये कठिन परीक्षा दिया।
तू बेवफा नही हम जानते हैं, तुझे पहचानते हैं।
साथ नही रहती,फिर भी तुझे जानते हैं।
सच्ची मोहोब्बत की,निशानी तुमको मानते है।
तभी तो रखते हैं, दिल के हर कोने में तेरा ख्वाब।
हर यादो में सजाये रखते है, तेरे यादो का ख्वाब।
प्रेम किया है, तेरे तन-मन और आत्मा से।
पल-पल चाहते हैं, आत्मा और दिल से।
रग-रग में समाई रहती हो,जीवन तुझके कहते हैं।
आँखो के हर सपना पे,तुमको सजाये रखते हैं।
तेरे चन्दन सी खुसबू,दिल मे समाई रहती है।
तू साथ नही मेरे, फिर भी साथ लगती है।
तेरे हर बातो को,यादो का शिलशिला हम कहते हैं।
हर पल तेरे ही यादो में,जीवन गुजरा करते हैं।
पास नही रहती हो,पर यादो में पल-पल रहती हो।
मेरे जीवन का एक,सुंदर सा प्यारा सपना हो।
तेरे हर बातो को, स्मृति में सजाये रखते हैं।
तू पास नही मेरे, फिर भी पास लगती है।
तेरे चूड़ी की खनक,आज भी सुनाई देती है।
तेरे पायल की झंकार,मेरे दिल मे गूंजती है।
तेरे माथो की बिंदिया,मेरे दिल मे चमकती है।
तेरे कानो की बलिया,मेरे नजरो में रहती है।
तेरे काली बालो की घटा,सावन बन बरसती है।
तेरे ओठो की मधुर मस्कान,आज भी स्मृति में रहती है।
तू पास नही मेरे,फिर भी पास लगती है।
जीवन के हर ताने-बाने में,साथ ही तो रहती है।
मेरे दिल मे सुंदर पुष्प बन,महकती रहती है।
दूर कहा है साथी,यादो में पल-पल रहती है।
तेरे दुरियो का अहसास नही,पास ही तो रहती है।
हर वक्त मेरे जीवन मे,अहसास तुम्हारी रहती है।
साथी हो मेरे, मेरे साथ निभती रहती है।
जीवन की हर संघर्षो में,साथ खड़ी तू रहती है।
दूर कहा हो साथी,पास मेरे तु रहती है।
लोगो का क्या ?है, कुछ भी कहा करते हैं।
तू मेरे सच्चे साथी है, बेवफा नही है।
हृदय से बन्धन प्रेम का,कभी भुलाया नही जा सकता।
दूर रहो या पास,दिल से निकाला नही जा सकता।
ये रिश्ता है साथी, प्रेम और स्नेह का।
ये बन्धन है साथी,प्रेम और विश्वास का।
आत्म से आत्मा की तृप्ति ,प्रेम की निशानी है।
दूर रह कर भी,ये जीवन भर साथ निभानी है।
सायद यही तो,एक अच्छी प्रेम की स्नेह भरी कहानी है।
दूर रह कर भी,यादो में समाई रहती है।
मेरे तन और मन को,सुकून से भरती रहती है।
मेरे जीवन की ,सच्चे जीवन साथी हो तुम।
मेरे सच्चे प्रेम के, अनमोल कहानी हो तुम।
तुमसे अलग नही हुँ साथी,साथ मेरे तुम रहती हो।
मेरे स्मृति के हर कोने में,यादे बन कर रहती हो।
ये यादो का शिलशिला,जीवन भर यू ही चलता रहे।
सच्ची प्रेम की,यादो भरी कहानी सदा ही चलता रहे।
तू साथी है मेरा,जीवन साथी है मेरा।
तू सच्ची प्रेम है मेरा,तू प्यारा सा स्नेह है मेरा।
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एक घंटा पहले

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