आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

नौकरी नईखे मिलत

                
                                                         
                            का आपन हाल बताई, कैसे आपन चाल देखाई
                                                                 
                            
लोर केतना बहल अंखिया से, अब छोड़ का रुमाल देखाई
बीतल सुबह शाम दिनो दुपहरिया बस एहि टकरार में
नौकरी नईखे मिलत भैया BJP सरकार में।

बीस गो लईकन के एक यूनिट में, पांचे गो लईका आवत बा
आपना उपस्थिति के बदला में, गुरु जी के खर्चा उठावत बा
ज्ञान से ओकरा मतलब नईखे, बैठल बस डिग्री के इंतजार में
नौकरी नईखे मिलत भैया BJP सरकार में।

पढ़े-लिखे के काम छोड़ के, बाकी हर जगह मन लागत बा
मोबाईल के संगे ही ऊ अब सुतत बैठत जागत बा
स्कूल-कॉलेज से बेसी मजा बा कोचिंग के दरबार में
नौकरी नईखे मिलत भैया BJP सरकार में।

सच्चाई कह दिहनी त हम अब अंधभक्त कहा जाईब
हा अगर व्यवस्था सुधारे चलम त एकदम सख्त कहा जाईब
नौकरी कईल अब बहुत मुश्किल बा काम-चोरन के संसार में
नौकरी नईखे मिलत भैया BJP सरकार में।।
-ऋषभ दुबे रिशु
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
18 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर