शहर के सारे ग़म खरीद लूंगी।
हर ज़ख्मों का मरहम खरीद लूंगी।
ये दुनिया कितनी भी क्यों न बेशर्म हो
पर मै दुनिया के हर शर्म खरीद लूंगी।
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