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माता पिता को छोड़कर शहर में बसना

                
                                                         
                            हर गली ढूंढ़ती है शहर का ठिकाना
                                                                 
                            
गांव छूटे हैं कोई बना के बहाना
इतने दिनों तक रहे तुम जहां
गुजरा है बचपन खेला है जमाना
जा माटी की खुशबू सताएगी तुझको
जितना है रोई मां रुलाएगी तुझको
ये दौलत,ये सौहरत, है वजूद क्या इसका
जब होगा तू बूढ़ा बताएगी तुझको
कभी हाल पूछो, कभी तो बताओ
मिले गर समय तो बैठकर तुम सुनाओ
न छोड़ा तुझे ,कभी भी अकेला
तू जो गया फिर न उसको बुलाया
क्या होता अगर छोड़ जाती वो बचपन में
देता तू गाली न जाता तू आंचल में
करे गर यहीं वो तो क्या बीतेगा तुझपर
बताते हो तुम ये तो बीता है सबपर
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1 hour ago

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