जिंदगी अपनी है, मगर फैसले अपने नहीं हैं।
जी रहें हैं कैदियों जैसी जिंदगी,मगर मसले अपने नहीं हैं।
आवाज़ फैली पड़ी है हम सरल लड़कियों के बारे में ....
किताबें तो अपनी हैं,मगर जुमले अपने नहीं हैं।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X