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एक आत्मा का पत्र - कृष्ण के नाम

                
                                                         
                            कभी-कभी लगता है सब ठीक है,
                                                                 
                            
कभी दिल बिलकुल खाली सा हो जाता है।
कभी हँसी आ जाती है बिना वजह,
और कभी आँखें चुपचाप रो लेती हैं बिना बताए।
कभी-कभी लगता है बाहर निकल जाऊँ इन हवाओं मेंखो सी जाऊँ
और प्रकृति से ढेर सारी बातें करूँ।
कभी-कभी मन करता है,आपकी बनायी हुई इस दुनिया को आपकी ही नज़र से देखूँ,
और आप जो महसूस कर रहे हैं, उसे अपने दिल से महसूस कर पाऊँ।
हम छोटी-छोटी चीज़ों में खुश रहना भूल गए हैं,
जिनके पास कम है उन्हें ज़्यादा चाहिए,
और जिनके पास ज़्यादा है उन्हें और अधिक।
लेकिन हम यह भूल गए हैं कि—"कृतज्ञता (Gratitude) ही सबसे खूबसूरत प्रार्थना है।
"यह दुनिया ऐसी कैसी है, मैं जानती हूँ,बिना इच्छा के कुछ भी मुमकिन नहीं होता।
पर जिसके पास जितना है, वह उतने में खुश रहना ही नहीं चाहता,फिर भी हम इस माया भरी जगत के पीछे भागते रहते हैं और
भूल जाते हैं—"हरि नाम एव केवलम्...
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2 घंटे पहले

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