आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

बादल की चाह

                
                                                         
                            नट खट बादल आओ जी
                                                                 
                            
मोती बूंद लुढ़काओ जी।
बच्चे बड़े किशोर युवा
सबका मन बहलाओ जी।

सबका मन बहलाओ जी,
खेत खलिहान ताल तलैया।
कागज़ कश्ती मैं चलाऊ
मेरा हाथ बांटाओ जी।

हित मीत संगी साथी
सबको गले लगाओ जी
धानी चुनर धरती को
अपने हाथ पहनाओ जी।

हरि हरियाली चारों तरफ
हरि का धुन मचाओ जी
नट खट बादल आओ जी
मोती बूंद लुढ़काओ जी।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर