वो सावन का पावन माह था,बिजली गरज रही थी अम्बर मेेें I
सब भीग रहे थे बारिश में,वो खेल रहे थे युद्धों मेेें I
कभी गरजता था अम्बर, कभी, बोफोर्स सलामी देती थी I
माँ के निर्भय वीर जवानों ने, दुश्मन की छाती तोड़ी थी I
हर पुत्र बना था रुद्र रूप, हर हाथ उठा रण चंडी सा I
हर शस्त्र पिया था शत्रु रक्त, हर ओर काल का डेरा था I
उस पुण्य समय की बेला पर, वीरों ने शत्रु संहार किया I
उस पुण्य समय की बेला पर, वीरों ने शत्रु संहार किया I
रवि जोशी
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