छैल भँवर के पास ना चल तू,
रूठे हैं तो इतना अभिमान ना कर तू।
लहरों का मिज़ाज समझना आसान नहीं,
हर मुस्कान के पीछे छुपा तूफ़ान सही।
किनारे बैठे हैं तो बैठने दे उन्हें,
हर बात पर फिर से मनाने की ठान ना तू।
जो रूठे हैं, उन्हें थोड़ा वक्त भी दे,
हर पल उनके पीछे अपनी जान न दे तू।
भँवर के पास जाकर कश्ती क्यों सजाता है,
जो डूबने का डर हो, फिर क्यों आज़माता है?
मोहब्बत है तो थोड़ा लिहाज़ भी रख,
हर रिश्ते को जीतने की ज़िद में परेशान न कर तू।
कभी चुप रहना भी जवाब हुआ करता है,
कभी दूरी में भी प्यार हुआ करता है।
जो दिल से अपने हैं, लौटकर आएँगे ही,
उनके लौटने से पहले कोई ऐलान न कर तू।
अभिमान की दीवार ऊँची बहुत होती है,
एक छोटी-सी बात भी फिर बड़ी होती है।
झुकना अगर रिश्ते को बचा सकता है,
तो इसे अपनी हार समझकर परेशान न कर तू।
छैल भँवर के पास ना चल तू,
रूठे हैं तो इतना अभिमान ना कर तू।
कश्ती बचानी है तो लहरों को पहचान,
हर चमकती लहर को अपना मेहमान न कर तू।
वक्त को थोड़ा वक्त दे, सब ठीक हो जाएगा,
जो अपना है वो फिर तेरे करीब आएगा।
बस दिल में मोहब्बत रख, चेहरे पर मुस्कान रख,
रिश्तों को जीतने के लिए कोई तूफ़ान न कर तू।
-रतन कुमार कैथवास
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