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तेरी साँसें याद आती हैं

                
                                                         
                            ख़्वाबों में कितने शहर घूमा हूँ, कैसे बताऊँ,
                                                                 
                            
पानी में जब डुबकी लगाता हूँ, तो तेरी साँसें याद आती हैं।

दरिया की हर लहर में तेरा अक्स दिखाई देता है,
साहिल पर बैठूँ तो तेरी बातें याद आती हैं।

कितने मौसम बीत गए तेरे इंतज़ार में लेकिन,
बरसातों में भीगी हुई वो मुलाक़ातें याद आती हैं।

मैंने तो समंदर से भी गहरा रखा है तुझको,
लहरों को छूता हूँ तो तेरी आहटें याद आती हैं।

नींदों में रोज़ कोई नया शहर देख लेता हूँ,
सुबह होते ही तेरी वो गलियाँ याद आती हैं।

कहने को भूल गया हूँ मैं तेरा नाम मगर,
ख़ामोश रहूँ तो दिल में तेरी ही सदाएँ याद आती हैं।
-रतन कुमार कैथवास
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34 मिनट पहले

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