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निकलो स्कूल को

                
                                                         
                            बंद करो तुम रोना-धोना, सज-सँवरकर निकलो स्कूल को,
                                                                 
                            
कंधे पर बस्ता रख लो, छोड़ो अब इस उसूल को।
आज भले ही मन न लगता हो, कल मन भी लग जाएगा,
थोड़े दिनों में दोस्त बनेंगे, स्कूल तुम्हें बुलाएगा।

पहले-पहले अजनबी लगेंगे चेहरे सारे स्कूल के,
फिर किस्से होंगे टिफिन के और खेल होंगे फूल के,
जो आज तुम्हें नाम से भी शायद नहीं पहचानते हैं,
कल वही टीचर तुम्हें देखकर मुस्कुराकर बुलाते हैं।

नई किताबें, नई कक्षा, नई सुबह का नया सफ़र,
धीरे-धीरे अपना लगेगा यह भी छोटा-सा शहर,
जिस बेंच पर आज अकेले बैठकर मन घबराता है,
वहीं किसी दिन दोस्तों संग हँसते-हँसते दिन कट जाता है।

तो चलो, आज बहाने छोड़ो, स्कूल चलो मुस्कान लिए,
कल की चिंता छोड़ो, आज के सुंदर अरमान लिए,
मन को थोड़ा समय दो, सब अपने आप सँवर जाएगा,
जिस स्कूल से आज भागते हो, कल वहीं जाने को मन करेगा।
-रतन कुमार कैथवास
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3 घंटे पहले

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