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इरादा बहुत बड़ा है

                
                                                         
                            उफनाती दरिया से कह दो, उधर ही रहे अभी,
                                                                 
                            
साहिलों को न देखे, न इधर बहे अभी।
कश्ती उतारी है मैंने, बड़े अरमान से दरिया में,
ज़रा संभलकर चले पानी, मेरी जान है कश्ती में।

लहरों से कह दो अपना ज़ोर ज़रा कम कर दें,
मेरी कश्ती के हौसले को यूँ न बेअसर कर दें।
अभी पतवार हाथ में है, मगर सफ़र नया है,
दिल में उम्मीद बहुत है, पर समंदर खफा है।

हवाओं से कह दो अभी अपनी रफ़्तार रोक लें,
मेरे सपनों की कश्ती को थोड़ा आराम दे दें।
किनारे दूर सही, मगर नज़र में तो हैं अभी,
मंज़िल की तरफ बढ़ रहे हैं, डूबे कहाँ अभी।

दरिया अगर गहरा है तो हौसला भी गहरा है,
कश्ती छोटी सही, मगर इरादा बहुत बड़ा है।
लहरें जितनी उठेंगी, उतना ही हुनर आएगा,
जो तूफ़ानों से लड़ेगा, वही साहिल पाएगा।

अभी इम्तिहान है, इसे हादसा न बनने देना,
मेरी उम्मीदों को लहरों का तमाशा न बनने देना।
ज़रा ठहरकर बहना, ऐ दरिया, मेरी बात मान,
कश्ती नई है मगर इसमें बैठा है पुराना अरमान।

आज साहिल दूर है तो क्या, कल पास आएगा,
हर उफान एक दिन खुद रास्ता बन जाएगा।
बस इतनी-सी गुज़ारिश है, अभी ज़ोर से न बह,
मेरी कश्ती को थोड़ा संभलने दे… फिर जितना चाहे बह।
-रतन कुमार कैथवास
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3 घंटे पहले

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