मुझे छोड़ दे मेरे हाल पर, मेरी ख़ामोशी को सदा न दे,
जो बुझा चुका है चराग़ दिल, उसे फिर से कोई हवा न दे।
मैंने मान ली है ये हार भी, मुझे जीतने का गुमाँ न दे,
मेरे ज़ख़्म अब भी हैं अज़ीज़, मुझे दर्द की कोई दवा न दे।
तेरी याद ही तो है पास अब, इसे मुझसे कोई जुदा कर न दे,
मैं इसी में अपना जहान रखूँ, मुझे इससे बढ़कर ख़ुदा कुछ न दे।
तू अगर मेरा नहीं हो सका, तो मुझे अपना कह के सज़ा न दे,
मेरी प्यास को समझ ज़रा, मुझे सामने ला के प्यासा कर न दे।
-रतन कुमार कैथवास
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