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बारिस में बहा ले जाऊँ

                
                                                         
                            तू अगर प्यास लिए आया है,
                                                                 
                            
तुझे अपनी गहराई में छुपा ले जाऊँ?

तेरे साहिल पे बहुत लोग मिले,
तुझको लहरों में बसा ले जाऊँ?

तेरी आँखों में जो ठहरा है धुआँ,
उसको बारिश में बहा ले जाऊँ?

तूने जो दर्द छुपा रखा है,
आज कह दे, मैं उड़ा ले जाऊँ।

तू अगर लौट के जाना चाहे,
मैं तुझे अपना बना कर ले आऊँ?

मैंने हँसकर कहा… दरिया ठहर,
मैं तुझे पार करा कर ले जाऊँ।
-रतन कुमार कैथवास
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एक घंटा पहले

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