हवा के साथ सभी रास्ते बदलते रहे,
किसी ने दर्द न पूछा उस की दुनिया से।
जो साथ चलने का वादा था धूप में कभी,
वो मोड़ आते ही छोड़ दिया रहनुमाई में।
तमाम उम्र जिसे अपना रास्ता समझा,
वहीं पे रोक दिया एक अजनबी हवा ने।
मैं अपनी प्यास लिए चलता रहा दरिया तक,
मगर सवाल किया मेरी ही प्यास ने।
किसी के लौट के आने की आस क्या रखना,
बहुत बदल दिए चेहरे यहाँ हवाओं ने।
-रतन कुमार कैथवास
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