रात चुप है, फिर भी कोई बात होती जा रही है,
किसकी आहट है जो बहती चाँदनी पानी में है।
साहिलों ने लाख कोशिश की भला समझें उसे,
एक चेहरा है जो अब तक अनकही कहानी में है।
डूबकर देखा तो अपना ही साया नज़र आया मुझे,
कौन कहता है कि गहराई सिर्फ़ पानी में है।
जिसको ढूँढा था ज़माने भर की वीरानी में हम,
वो मिला तो एक ख़ामोश सी रवानी में है।
चाँद उतरा है कि कोई ख़्वाब उतरा रात में,
आज शायद फिर किसी की याद पानी में है।
-रतन कुमार कैथवास
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