देश मेरे, अभिमान तू मेरा,
शान तिरंगा है।
तुझ पर जीवन वार दूँ अपना,
प्राण तिरंगा है॥
गर्व मुझे भारत में जन्मा,
भारत मेरी माटी है।
इसी धरा में मिल जाना है,
यही मेरी थाती है।
हिन्द का तगमा गले में हो,
यही मेरा सम्मान,
माथे की बिंदी बनकर दमके,
मेरी आन तिरंगा है॥
हिमशिखरों से लेकर सागर,
तेरा ही विस्तार है।
धरती, अम्बर, जल और नभ में,
तेरा ही संसार है।
रणभूमि में वीरों के हाथों,
लहराए तू शान से,
तेरे रंग में रंगा हुआ हर,
हिन्दुस्तान तिरंगा है॥
आजाद, सुभाष और भगत सिंह का,
बलिदान भुलाना नहीं।
बिस्मिल, सरदार, रानी लक्ष्मीबाई का,
अरमान भुलाना नहीं।
जिन वीरों ने हँसकर दे दी,
मातृभूमि पर अपनी जान,
उन सबके सपनों का पावन,
अभिमान तिरंगा है॥
वीरों का बस एक ही सपना—
तिरंगे में लौटें वे।
माँ की गोदी, भारत-माटी,
यही कहकर सोए वे।
जब अंतिम यात्रा निकले उनकी,
तोपों से सम्मान मिले,
वीरगति का गौरव बनकर,
गुमान तिरंगा है॥
हिम से लेकर सागर तक हम,
एक थे, एक रहेंगे।
भाषा, बोली, वेश भले हों,
भारतवासी एक रहेंगे।
गाँव, नगर, कस्बों की धड़कन,
एक सुर में गाती है—
जन-जन की पहचान तिरंगा,
भारत की आन तिरंगा है॥
केसरिया त्याग सिखाता,
श्वेत शांति का संदेश।
हरा रंग खुशहाली लाता,
चक्र बढ़ाता देश।
तीनों रंगों में बसता है,
भारत का गौरव महान—
मेरे दिल की धड़कन तिरंगा,
मेरी जान तिरंगा है॥
देश मेरे, अभिमान तू मेरा,
शान तिरंगा है।
तुझ पर जीवन वार दूँ अपना,
प्राण तिरंगा है।
जन-जन के मन में लहराए,
सदा तेरा सम्मान—
भारत माँ के माथे का
अमर निशान तिरंगा है॥
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