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मुंबई की लोकल

                
                                                         
                            मुंबई की लोकल!
                                                                 
                            

लोकल हूँ मैं मुंबई की,
नाता तो पुराना है।
ये जीवन का सफर ऐसा,
आना और जाना है।

दिन-रात दौड़ती हूँ,
इतनी-सी कहानी है।
मेरी आँख में है दरिया,
होंठों पे जवानी है।
मुझे अपने ही लोगों को,
मंजिल पहुँचाना है,
लोकल हूँ मैं मुंबई की,
नाता तो पुराना है।
ये जीवन का सफर ऐसा,
आना और जाना है।

बसते हैं हुनरवाले,
चेहरे ये गुलाबी हैं,
रिश्तों की लिबासों में,
लगते नायाबी हैं।
मेहनत की बदौलत ही
जिन्दगी ये सजाना है,
लोकल हूँ मैं मुंबई की,
नाता तो पुराना है।
ये जीवन का सफर ऐसा,
आना और जाना है।

जो चोट लगी दिल पे,
वो चोट पुरानी है।
कुछ अपने ही लोगों की,
इसमें नादानी है।
मुझे अपनी नजाकत को,
गैरों से बचाना है,
लोकल हूँ मैं मुंबई की,
नाता तो पुराना है।
ये जीवन का सफर ऐसा,
आना और जाना है।

रामकेश एम. यादव (कवि,साहित्यकार ),मुंबई
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3 वर्ष पहले

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