एक साथ इकट्ठा खड़े होकर माता के द्वारे सभी,
लगा रहे हैं जोर-जोर से माता के जयकारे सभी |
मुखडे से लग रहे हैं अति सुंदर अति प्यारे सभी,
कहते हुए एक तू है दुख हरने वाली हमारे सभी||
तुम्हारी ही शक्ति से चमक रहे हैं चांद तारे सभी,
तुम्हारी शक्ति से ही टिके हैं गगन में सितारे सभी|
तुम्हारी शक्ति से ही तो है सृष्टि की ये नजारे सभी,
तो फिर जय माता दी कहकर क्यों न पुकारे सभी||
देवता भी तेरी मिल आरती क्यों न उतारे सभी,
देवताओं के भी तो तू ने जो संकट है टारे सभी|
शुंभ निशुंभ जैसे वे राक्षस थी तू ने संघारे सभी,
जिनसे ब्रह्मा विष्णु शिव सहित देव थे हारे सभी||
-मनस्व
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