अलग-अलग पूजा स्थल अलग-अलग कर्मकांड और अलग-अलग पूजा का विधि विधान,
अलग-अलग रीति रिवाज अलग-अलग परंपराएं अलग-अलग बोली भाषा अलग-अलग परिधान,
इन सभी को एक सूत्र में जोड़कर भी रखने वाला और सब में एक देश का भाव भी जगाने वाला,
सचमुच बड़ा ही अद्भुत एकदम अनूठा और आदरणीय है अपने महान भारत देश का संविधान|
-मनस्व
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