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प्रकृति की औषधि

                
                                                         
                            *प्रकृति की औषधि*
                                                                 
                            
~डॉ रामानुज पाठक सतना म प्र

हर रोग की दवा घर में,
हर उत्तर है वन में,
प्रकृति की छोटी-सी थाती,
छिपी हुई है कण-कण में।

नारियल शीतलता देता,
पपीता पाचन सुधारे,
अदरक-शहद गले को सँभाले,
तुलसी तन-मन निखारे।

आँवला स्वास्थ्य का साथी,
अनार रक्त का मान,
तरबूज जल की पूर्ति करे,
गाजर दे पोषण-ज्ञान।

लहसुन, हल्दी, काली मिर्च,
रसोई की औषधि प्यारी,
नींद, तनाव और थकान में,
संतुलित दिनचर्या हितकारी।

पर याद रहे—हर पीड़ा का
घरेलू उपचार नहीं होता,
समय पर चिकित्सक की सलाह
लेना भी आवश्यक होता।

प्रकृति ने उपहार दिए हैं,
इनका सम्मान करें,
सात्त्विक भोजन, श्रम, विश्राम से
जीवन को स्वस्थ करें।

औषधि केवल वन में नहीं,
संयमित जीवन में भी है;
स्वास्थ्य कोई चमत्कार नहीं—
सही आदतों की जीत है।
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4 घंटे पहले

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