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गंगा माँ - गंगा नदी

                
                                                         
                            गंगा
                                                                 
                            
शिव की जटाओं से निकली
गंगा
भागीरथ की बेटी
गंगा
एक नदी
एक माँ
एक पहचान
एक पवित्रता
एक कसम
गंगा
एक माँ
गंगा
माँ कभी गंदी नहीं होती
वो बच्चों की गंदगी ख़ुद मे समेट कर भी
कभी गंदी नहीं होती
माँ सदा पाक साफ़ होती है
बच्चे लाख शैतानी करे
उसे गंदा करें
उसके पास न जायें
परन्तु चैन उन्हें माँ की गोद में ही मिलता है
वो ही तो है ,
वहीं तो है
सबका चैन
सबका सुकून
गंगा
न कभी मैली होती है
न गंदी होती है
बस पाक साफ़
निरंतर बहती रहती है
अपनी बाँहें फैलाये
चुपचाप
बहती रहती है
परन्तु उसकी लहरें
ठंडी लहरें
बहुत कुछ कहने को बेताब रहती हैं
बेचैन लहरें
कहना चाहती है
बताना चाहती है
माँ को भी दर्द होता है
माँ के आँचल में गंदगी मत फेंको
बहुत दुख होता है माँ को
अपना तिरस्कार देखकर
ये अपमान एक नदी का नहीं
एक माँ का है
इससे पाक साफ़ रिश्ता रखो
शहरों की गंदगी
औद्योगिक रसायनों का गंद
अस्थियों की राख
समेटते समेटते थक गई अब
गंगा
निरिह बन निहार रही
बेबस लहरें पुकार रहीं
मत करो मत करो मत करो
माँ को गंदा
सोचो
ग़र गंगा मैली हो गई
ग़र गंगा की लहर सूख गई
तो क्या होगा
॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰
शिव तांडव कर देंगे
गंगा बिना
शिव कैसे सोहेंगे
गंगा बिना
भारत कैसे सोहेगा
गंगा बिना
मोक्ष कैसे होवेगा
रोक लो विनाश को
बचा लो
सर्वनाश से
यही कहती
बेचारी गंगा
-रमा पूर्णिमा शर्मा
 
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7 महीने पहले

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