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पूज्य तुलसीदास जी के प्रति

                
                                                         
                            ओ जन मानस के कंठ हार
                                                                 
                            
हे राम चरित सर के मराल
कविता सरिता के दिव्य देव
शतवार तुम्हें मेरा प्रणाम
तुलसी प्रतिभा के शिखर पुरुष
साक्षात धर्म के मूर्त रूप
तुमको पाकर कविता वनिता
हो गई दिव्यतम और अनूप
तुलसी सम पावन हे तुलसी
जीवन दर्शन के कर्ण धार
हे मानवता के अमर देव
कवि कुलभूषण तुमको प्रणाम
हे हिंदु संस्कृति के रक्षक
तुम राम काव्य के चित्रकार
मर्यादाओं के मूर्त रूप
हे कालजयी तुमको प्रणाम
स्वान्त: सुखाय तव काव्य सृजन
बन गया वही जन-जन हिताय
कविता सुरसरि के भागीरथ
हुलसी सुत को मेरा प्रणाम
-राम प्रकाश मिश्र वत्स
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9 महीने पहले

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