मां शक्ति का सातवां स्वरूप कालरात्रि कहलाता है।
नवरात्रि के सातवें दिन इनको ही पूजा जाता है।।
मां ने बधा महिषासुर को देवताओं ने सत्कार किया।
कभी समस्या आ जाए मां ने आना स्वीकार किया।।
महिषासुर के मरने पर शुंभ निशुंभ ने आतंक मचाया है।
देवताओं को करके पराजित इंद्रलोक हथियाया है।।
देवता मांगने आए सहायता मां ने उन्हे आस्वस्त किया।
मारने का अत्याचारियों को मां ने बन्दोबस्त किया।।
कर धारण चंडिका स्वरूप धूम्रलोचन का संहार किया।
चण्ड मुण्ड का बध करके उनका भी उद्धार किया।।
रक्तबीज का बध करने को मां ने है इंतजाम किया।
गिरने न पाए खून जमीं पर इसीलिए रक्तपान किया।।
रुधिरहीन जब हुआ शरीर तब उसका अवसान किया।
मारकर शुंभ निशुंभ राक्षस को इंद्रलोक लौटान किया।।
जो भक्तजन मां के कालरात्रि स्वरूप की पूजा करते हैं।
सदा रहते हैं निशंक व निर्भय नहीं किसी से डरते हैं।।
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