आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

सदा रहते हैं निशंक व निर्भय नहीं किसी से डरते हैं।।

                
                                                         
                            मां शक्ति का सातवां स्वरूप कालरात्रि कहलाता है।
                                                                 
                            
नवरात्रि के सातवें दिन इनको ही पूजा जाता है।।
मां ने बधा महिषासुर को देवताओं ने सत्कार किया।
कभी समस्या आ जाए मां ने आना स्वीकार किया।।
महिषासुर के मरने पर शुंभ निशुंभ ने आतंक मचाया है।
देवताओं को करके पराजित इंद्रलोक हथियाया है।।
देवता मांगने आए सहायता मां ने उन्हे आस्वस्त किया।
मारने का अत्याचारियों को मां ने बन्दोबस्त किया।।
कर धारण चंडिका स्वरूप धूम्रलोचन का संहार किया।
चण्ड मुण्ड का बध करके उनका भी उद्धार किया।।
रक्तबीज का बध करने को मां ने है इंतजाम किया।
गिरने न पाए खून जमीं पर इसीलिए रक्तपान किया।।
रुधिरहीन जब हुआ शरीर तब उसका अवसान किया।
मारकर शुंभ निशुंभ राक्षस को इंद्रलोक लौटान किया।।
जो भक्तजन मां के कालरात्रि स्वरूप की पूजा करते हैं।
सदा रहते हैं निशंक व निर्भय नहीं किसी से डरते हैं।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर