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मैं ख़ुद भी पहले जैसा क्यों नहीं

                
                                                         
                            ये नया इश्क़ उस इश्क़ जैसा क्यों नहीं,
                                                                 
                            
मैं ख़ुद भी पहले जैसा क्यों नहीं।

जो टूटा था मेरे अंदर कभी,
वो फिर से जुड़ता क्यों नहीं।

किसी और को चाह तो रहा हूँ मैं,
पर दिल उसका होता क्यों नहीं।

शायद कुछ रह गया है उस इश्क़ में,
जो ढूँढ़े जा रहा हूँ मैं इस इश्क़ में।

ये नया इश्क़ उस इश्क़ जैसा क्यों नहीं,
मैं ख़ुद भी पहले जैसा क्यों नहीं....
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12 घंटे पहले

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