यहाँ हर शख़्स ही देवदास है,
नशा शराब का नहीं, यादों का है।
किसी की पारो शहर छोड़ गई,
किसी की पारो अब किसी के पास है।
इश्क़ यहाँ मुकम्मल किसका हुआ,
हर सीने में इक क़िस्सा उदास है।
कोई ख़तों को अब भी चूमता है,
कोई उसी गली के आस-पास है।
सबके लबों पर फ़र्क है बस इतना,
कोई कहता है, कोई ख़ामोश है।
कोई महफ़िल में हँस के टाल गया,
कोई तन्हाई में बहुत उदास है।
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