यही सच है, यही जीवन है
जब तुम अकेले होते हो,
तो तुम्हें किसी का साथ चाहिए,
और जब साथ मिल जाता है,
तो थोड़ी-सी स्वतंत्रता चाहिए।
मन को जो नहीं मिलता,
वही सबसे सुंदर लगता है,
इंसान का मन भी अजीब है,
मौसम की तरह बदलता रहता है।
दूरी में आकर्षण होता है,
पास आते ही कमियाँ दिख जाती हैं,
जिसे पाने की चाह थी कभी,
उसी में फिर कमियाँ नज़र आती हैं।
शायद यही मन की प्रकृति है,
यही उसकी उलझन, यही कहानी है—
जो दूर है, वही प्यारा लगता है,
जो पास है, उसमें कमी नज़र आती है।
यही सच है,
और यही जीवन है।
— रजनी
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