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वो बड़े मज़े में है

                
                                                         
                            जिसका ऐलान है कि वो बड़े मज़े में है,
                                                                 
                            
या तो वो फ़क़ीर है, या फिर नशे में है।

जिसने चाहत, दौलत, शोहरत सबको छोड़ दिया,
उसके चेहरे पर सुकून हर पल बसा हुआ।

और जो दर्दों को हँसी में छिपाए फिरता है,
शायद किसी झूठे नशे में जीता रहता है।

असल मज़ा तो उस दिल को ही नसीब होता है,
जो हर हाल में ख़ुदा का शुक्र अदा करता है।

न फ़क़ीरी आसान, न नशे का रास्ता सही,
सुकून तो मिलता है, जब इंसान ख़ुद से मिले कहीं।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

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