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बड़े महँगे पड़े मेरे रिश्ते मुझे

                
                                                         
                            रिश्तों की कीमत
                                                                 
                            

बड़े महँगे पड़े मेरे रिश्ते मुझे,
अपना-अपना कहकर
मेरी ज़िंदगी खा गए।

जिन्हें अपना समझकर
हर दर्द से बचाया था,
वही मेरे हिस्से में
न जाने कितने ज़ख़्म दे गए।

मैंने रिश्तों को
दिल से निभाया था,
उन्होंने रिश्तों के नाम पर
मुझे ही आज़माया था।

मैं सबके लिए
खड़ी रही उम्र भर,
और जब मेरी बारी आई,
सब किनारा कर गए।

बड़े महँगे पड़े
मेरे रिश्ते मुझे,
अपना-अपना कहकर
मेरी ज़िंदगी खा गए।

अब किसी के
अपना कहने पर भी
दिल यक़ीन नहीं करता,
क्योंकि अपनों के दिए ज़ख़्मों से
बड़ा कोई दर्द नहीं होता।

— रजनी
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11 घंटे पहले

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